मयकशे खामोश हुए , साकी के चले जाने के बाद,
की अब ये होश फ़ना हैं होश में आ जाने के बाद !!
सब कुछ लुटा दिए , तिशनगी में आपकी ,
आँख से अश्क , मांगे हैं हिसाब आप के जाने के बाद !!
कहा है दिल से ज़ज्ब कर ले ज़फ़ा की रवायत ,
की ये कोई क़यामत तो नहीं, इतना सहने के बाद !!
ऐ दिल , उसने उल्फत की , चाहे खेला ही सही ,
शायद याद आऊँ कभी ,मैं भी मिट जाने के बाद !!
हमने इंतज़ार किये बेसबब पर वो ना आई कभी ,
ये उम्मीद की वो आये वहां ,मेरे घर जाने के बाद !!
इन कंटीली यादों से किनारा कर लें ' ऐ तल्ख़' ,
की ना फिर याद आयें वो , सब भूल जाने के बाद !!
प्रवीश दीक्षित 'तल्ख़'
No comments:
Post a Comment