Sunday, June 13, 2010

मगर मैं खामोश रहूँ ...



हर जगह दर्द है पसरा ,
टीस सी दिल में बढ़ रही ,
बढ़ रही है ज़ख्मों में कसक ,
मगर मैं खामोश रहूँ। ....

फैल गए हैं स्वार्थ ,
समाज में सभ्य बनकर
अब झूंठ बिक रहा है,
सच की आड़ लेकर
मगर मैं खामोश रहूँ......

सड़क पे इंसान की लाश ,
वाहनों की रेलमपेल में
रुन्द्ती रही बार बार ,
बतियाते, आ जा रहे थे लोग
मगर मैं खामोश रहूँ। ..