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Saturday, September 12, 2009

यादों की जुगाली

रैन हमने सारी करवटें बदल कर काटी ,
चलती रही मन में तेरी यादों की जुगाली ।
हसरतों का पसीना , बह कर बदन से निकला ,
बेकस जज्बों का दरिया , आंसुओं में ना निकला॥
तनहाइयों की कातिल आहट तेरे कदम की ,
करती है कोई जुम्बिश , रह - रह कर मेरे दिल में।
दूर है तू फ़िर भी लगता है ऐसा दिल को ,
महकती हों तेरी सांसे मेरी चाहतों के चमन में।

जनाजा

कहते थे कि ना होंगे शामिल , जनाजे में किसी शराबी के ।
होटों से जाम लगा तो , कहा , अपने जनाजे में कौन जाता है॥

इक निगाह प्यार की

तरस गए है हम इक प्यार की निगाह को,
चल दिए कहाँ पे वो छोड़ अपने प्यार को ।
आपकी ये ज्यादती , इश्क को भारी पड़ी ,
बेकरार हो गए हम , इक प्यार की निगाह को।
तनहा ही रह जायेंगे आप , जिन्दगी की राह में।
की है जो वफ़ा तो हम , ज़फा भी कर दिखाएँगे
रूठकर सदा को हम , इस जहाँ से जायेंगे।