रैन हमने सारी करवटें बदल कर काटी ,
चलती रही मन में तेरी यादों की जुगाली ।
हसरतों का पसीना , बह कर बदन से निकला ,
बेकस जज्बों का दरिया , आंसुओं में ना निकला॥
तनहाइयों की कातिल आहट तेरे कदम की ,
करती है कोई जुम्बिश , रह - रह कर मेरे दिल में।
दूर है तू फ़िर भी लगता है ऐसा दिल को ,
महकती हों तेरी सांसे मेरी चाहतों के चमन में।
मन की ख़ामोशी , तन की ख़ामोशी. ख़ामोशी इच्छाओं की , अरमानो की ख़ामोशी , सच को जान कर उसे न कह पाने की ख़ामोशी , बिन वर्षा प्यासी धरती की ख़ामोशी , बिन जल धारा तडपती नदी की ख़ामोशी , लहरों की हलचल में समुन्दर की ख़ामोशी , अत्याचारी निजाम में घुट घुट जीती आवाम की ख़ामोशी कब टूटेगी चारों और पसरी अविश्वास की ख़ामोशी , कब तोड़ेंगे हम ये ख़ामोशी ..........?
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Saturday, September 12, 2009
जनाजा
कहते थे कि ना होंगे शामिल , जनाजे में किसी शराबी के ।
होटों से जाम लगा तो , कहा , अपने जनाजे में कौन जाता है॥
होटों से जाम लगा तो , कहा , अपने जनाजे में कौन जाता है॥
इक निगाह प्यार की
तरस गए है हम इक प्यार की निगाह को,
चल दिए कहाँ पे वो छोड़ अपने प्यार को ।
आपकी ये ज्यादती , इश्क को भारी पड़ी ,
बेकरार हो गए हम , इक प्यार की निगाह को।
तनहा ही रह जायेंगे आप , जिन्दगी की राह में।
की है जो वफ़ा तो हम , ज़फा भी कर दिखाएँगे
रूठकर सदा को हम , इस जहाँ से जायेंगे।
चल दिए कहाँ पे वो छोड़ अपने प्यार को ।
आपकी ये ज्यादती , इश्क को भारी पड़ी ,
बेकरार हो गए हम , इक प्यार की निगाह को।
तनहा ही रह जायेंगे आप , जिन्दगी की राह में।
की है जो वफ़ा तो हम , ज़फा भी कर दिखाएँगे
रूठकर सदा को हम , इस जहाँ से जायेंगे।
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